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कुछ कहूं… आधार कार्ड की महिमा…

दिनेश सिंह

“राम सजीवन चल बसे, परिजन शमशान ले जाकर आवाक हो गये, जब मुफ्त लकड़ी के लिए आधार कार्ड की मांग हुई। परिजनों ने हैरानी जताई कि हम तो शरीर लाए हैं। जलाने के लिए। आत्मा तो जा चुकी। अब कैसा आधार, लकड़ी टाल कर्मी ने दो टूक कहा, मुफ्त चाहिए तो आधार कार्ड लाइए, नहीं तो यहां से भूटिए। निगम का नियम है।”

कैसा जमाना आ गया पैदा होने से शमशान तक आदमी से ज्यादा आधार का वजूद है आदमी का अस्तित्व ही आधार है। वाह रे मोदी सरकार डिजिटल इंडिया में आधार बिना जीवन ही निराधार है। तीन साल का बालक यदि प्राइवेट स्कूल में प्रवेश पाए उससे पहले आधार कार्ड, राशन, चिकित्सा, प्रॉपर्टी, रजिस्ट्री, मुकदमा, जमानत कितना कहें। हर जगह आधार कार्ड उसी तरह आदमी रहे या ना रहे मगर उसका आधार कार्ड ही उसका इतिहास है। कार्ड नंबर डालो पूरी कुंडली निकालो। सुना है। कि बेनामी संपत्ति पर भी एक बिल ला रही है केंद्रीय सरकार। मतलब अब हर संपत्ति पूर्व एवं वर्तमान में सभी संपत्ति पर आधार कार्ड का नंबर होना आवश्यक है। सब्सिडी तो खत्म हो गई, लेकिन बैंकों के आधार अनिवार्यता से कितना धन जमा है। उसका आकलन तुरंत हो जाता है। कहना यह है कि आधार कार्ड बनवाने बदलवाने का खर्चा पब्लिक दे, और उसका फायदा पब्लिक से ज्यादा सरकार ले। देखना है कि आने वाले समय में आधार का कितना और कहां तक प्रवेश होगा। अभी तो प्रवेश की सीमा नजर नहीं आ रही। निजी जीवन में चिपका आधार लोगों की शांति से ज्यादा अशांति का कारण बन रहा है। पुलिस प्रशासन शासन द्वारा आधार नंबर से व्यापारी, अपराधी और उद्योग पति नेताओं को छोड़कर सभी को मनमाना नोटिस से बाधकर जेल, दफ्तर, गोपनीय जगहों पर बुलवा कर यथोचित संतुष्ट के बाद विभागीय अधिकारी अपने कृतित्व की सूची लंबी करते हैं।

इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री ने लोकसभा में पूछे प्रश्न पर बताया कि आधार कार्ड का वजूद खत्म नहीं होगा। इसे डीएक्टिवेट नहीं किया जा सकता है एक बार बन गया तो आदमी की मौत के बाद भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। मतलब यह है कि यह ऐसा मिसाइल है कि इससे जब चाहे जहां चाहे हमला कर लो व्यक्ति बच नहीं सकता है। इसकी मारक क्षमता अचूक है। और वर्तमान में सरकारें इस अस्त्र का वे खौफ इस्तेमाल कर रही हैं।

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