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देखिए कैसे संतों की मौतों से भरा रहा है निरंजनी अखाड़े का इतिहास, बेशुमार दौलत रही मौतों की वजह

निरंजनी अखाडे में पहले भी हुई हैं संतों की संदिग्ध मौत
अखाड़ों की बेशुमार दौलत कई बार बनी संतों की मौत की वजह

मठ मंदिरों और अखाड़ों की बेशुमार संपत्ति संतो के बीच खूनी संघर्ष का कारण हमेशा से बनती रही है यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी बड़े संत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है बल्कि इससे पहले भी अखाड़ों में कई बार खूनी संघर्ष में कई संतों की हत्याएं हुई और कई संतों की संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्यायें भी हुई और सबसे बड़ी हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि सच्चाई कभी सामने नहीं आई। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी में भी संतों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत कोई नई बात नहीं है। महंत नरेंद्र गिरि की कथित आत्महत्या भी उसी कड़ी का एक हिस्सा हो सकती है इससे पहले निरंजनी अखाड़े में कई संतों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है निरंजनी अखाड़े से जुड़े महंत आशीष गिरी जी महाराज और महंत दिगंबर गंगा पुरी जी महाराज की भी संदिग्ध परिस्थितियों में ही मौत हुई थी। लेकिन उसका सच भी आज तक कभी सामने नहीं आया आनंद गिरि ने अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि के साथ हुए विवाद के समय आरोप लगाया था कि निरंजनी अखाड़े की संपत्ति के विवाद में ही महंत आशीष गिरी की मौत हुई थी और इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए उन्होंने महंत दिगंबर गंगापुरी जी महाराज की भी मौत की जांच की मांग की थी।

17 नवम्बर 2019 को महंत आशीष गिरी ने खुद को गोलीमारकर आत्महत्या कर ली थी। आशीष गिरि की आत्महत्या पर कई सवाल उठे थे। मूल रूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले आशीष गिरि दारागंज स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आश्रम में रहते थे। संत का शव उनके कमरे में मिला था. उन्हें गोली लगी थी. उनकी हथेली में पिस्टल फंसी थी और पास में ही खोखे बरामद किये गये थे। मौत के बाद कुछ लोगों ने महंत नरेंद्र गिरि पर भी सवाल उठाए थे। उनकी मौत को लेकर तब नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद ने भी कई गंभीर सवाल भी खड़े किये थे। तब आनंद गिरी ने कहा था कि जमीनी विवाद को लेकर आशीष ​गिरी की हत्या की गई है. इसकी जांच सीबीआई से करने की भी मांग की गई थी। चौकाने वाली बात ये है कि आशीष गिरी की लाश बरामद होने के कई दिनों बाद तक इस मामले में कोई मुकदमा प्रयागराज में दर्ज नहीं किया गया था। हालांकि बाद में पुलिस जांच में कुछ नहीं निकला। कुछ इसी तरह से निरंजनी अखाड़े में रहने वाले महंत दिगंबर गंगा पुरी जी महाराज की भी संदिग्ध परिस्थितियों में ही मौत हुई थी। हालांकि दिगंबर गंगापुरी जी की मौत को लेकर अब तक कोई तस्वीर साफ नहीं हो पाई है लेकिन आनंद गिरि ने इनकी मौत को लेकर भी सवाल खड़े किए थे और सीबीआई जांच की मांग की थी आनंद गिरि के अनुसार गंगापुरी की मौत भी अखाड़े की संपत्ति विवाद की वजह से ही हुई थी।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक इन दोनों मामलों पर भी पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई और दोनों फाइलें अब बंद हो चुकी है ऐसे में महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्थी कब समझेगी और सुलझे की भी या नहीं यह भी सवालों के घेरे में है।

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