ब्रेकिंग
Siddharthnagar: बिजली के खंभे से गिरने पर विद्युत कर्मचारी की मौत, नाराज लोगों ने दिया धरनाAuraiya: राजा भैया ने किया रोड शो, विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं में भरा जोशइस शहर को कहा जाता है विधवा महिलाओं की घाटीAgra: बच्चों से भरी वैन के गड्ढे में गिरने से हुआ हादसाJhansi: युवा मोर्चा की जिला झाँसी महानगर कार्यसमिति की बैठक हुई सम्पन्नHamirpur: NH34 पर अतिक्रमण हटाने पहुंची कंपनी, विधायक ने मांगी मोहलतAyodhya: पांचवे दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए अवध यूनिवर्सिटी में तैयारी शुरूEtah: 100 प्रतिशत टीकाकरण करवा कर ग्रामीणों ने की मिसाल कायमMahoba: झाड़ियों में लावारिस पड़ा मिला नवजात शिशु, गांव में एक साल के अंदर यह दूसरी घटनाMahoba: सिंचाई विभाग का अजब कारनामा, मृतक किसानों के खिलाफ पुलिस को दी तहरीर

CM के निर्देशों को भी नहीं मान रहा हापुड़ विकास प्राधिकरण, लोगों ने शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में भवन बचाओ संघर्ष समिति अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई है. इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों ने हापुड विकास प्राधिकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. और अधिकारियों पर मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया. इतना ही नहीं इन लोगों की नाराजगी इस कदर है. कि इन्होंने आने वाले विधानसभा चुनावों का भी बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है. भवन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष ललित अग्रवाल ने बताया कि कई साल पहले हापुड़ विकास प्राधिकरण ने डवलपमेंट के लिए जिले के 3 गांव सबली, चमरी और अच्छेजा की जमीनों को अधिग्रहण किया था. लेकिन 800 रुपए वर्ग मीटर के हिसाब से एक्वायर की गई जमीन को आज प्राधिकरण 19 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से उन्ही लोगों को बेच रहा है. इस पर किसानों और बाकी लोगों ने जब आपत्ति जताई तो साल 2018 में मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण को निर्देश दिए कि भवन स्वामियों को डेवलपमेंट चार्ज जोड़कर इसमें समायोजित करें. लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों ने सीएम के निर्देशों को भी हवा हवाई कर दिया. जिससे इलाके के लोगों का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया है.

संघर्ष समिति का कहना है कि 800 रुपए वर्ग मीटर के हिसाब से ली गई जमीन को 19 हजार रुपए की दर से उन्ही लोगों को बेचना सरासर अन्याय है. और ये प्राधिकरण द्वारा गरीबों जनता का शोषण है. मगर, बार-बार आपत्ति जताने के बावजूद प्राधिकरण मानने को तैयार नहीं. ऐसे में अब इन लोगों ने आने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के बहिष्कार का फैसला लिया है. साथ ही विधान सभा चुनाव में वोटिंग नहीं करने का निर्णय लिया है. संघर्ष समिति का साफ कहना है कि अगर सरकार चाहती है कि इन लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकार पर भरोसा बना रहे तो इन लोगों की मांगें मान ली जाएं. वरना ये धरना रोज 11 बजे से 12 बजे तक ऐसे ही चलता रहेगा. जो आने वाले विधानसभा चुनाव से पार्टियों के लिए एक बड़ा नुकसान का कारण बन सकता है.

Related posts

Leave a Comment

अपना शहर चुने

Top cities