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मुरादनगर: बिजली का खंभा टिका घर के सहारे, अधिकारियों को है हादसे का इंतजार

दिनेश सिंह, गाजियाबाद

मुरादनगर: बारिश का मौसम है। हर जगह पानी है। बिजली विभाग की बढ़ती जा रही लापरवाही से हादसों का दौर जारी है। जबकि राकेश मार्ग विद्युत हादसे से पांच जाने जा चुकी हैं। कहीं मवेशी तो, कहीं आदमी करंट की चपेट में आ रहे हैं। लेकिन मुरादनगर उपखंड अधिकारी अंशुल राठी एवं अवर अभियंता अमल सिन्हा नोडल अधिकारी संदीप कुमार जो जिम्मेदार पद पर हैं।  बाकी टीम संविदा कर्मियों की है। जो इनके निर्देशों पर काम करते हैं। उन्हें यह टूटा हुआ बिजली का खंभा नजर नहीं आ रहा है। जिस पर 440 वोल्ट का खुला करंट दौड़ रहा है।

आपको बता दें कि यह हादसे को दावत देता पोल वार्ड 16 नाला पट्टी ईदगाह रोड ईदगाह बस्ती में हिदायत अली के मकान के पास पिछले 15 दिन से यह पोल टूटकर दीवाल के सहारे टिका है। जिस पर 440 वोल्ट की एलटी लाइन पर खुला तार पड़ा है। जिसमें करंट दौड़ रहा है। इस घोर लापरवाही का जिम्मेदार जेई एवं लाइनमैन के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई हो रही है। यदि कोई गंभीर हादसा हो जाएगा तो, यही विभाग तमाम दलीलें देने लगेगा कि हमारा पोल ठीक था। लोगों ने मकान का छज्जा बढ़ा लिया। जिससे हादसा हुआ। यद्यपि ऐसे मामले भी होते हैं। जहां पर यही अधिकारी संविदा कर्मियों के द्वारा पैसा वसूल कर विद्युत लाइन को मन मुताबिक मकान से दूर करते रहते हैं। लेकिन यहां पर कोई धन देने वाला नहीं है तो, अधिकारी चुप हैं।

बताते चलें कि शुरुआत में प्राइवेट क्षेत्र ज्यादा उन्नत नहीं था। उस दौर की सरकारें हर उपक्रम को सरकारी नाम देकर वैधानिक पावर भी इन निगमों को दिया था। कि आप अपने हित के नियम निर्धारित करके अपने मुताबिक नियमावली बनाकर चलाइए इसीलिए रेलवे, ऊर्जा, खनिज और पेट्रोलियम जितने भी सेक्टर हैं। इनमें नागरिकों या उपभोक्ताओं के अधिकार गौण हैं। नागरिक हित ना के बराबर हैं। वहां भी नियमों की दुहाई दी जाती है। इस प्रकरण में नियमानुसार बिजली विभाग को मकान मालिक को हर्जाना देकर लाइन को मकान से दूर करना चाहिए। लेकिन विभाग ऐसा नहीं करेगा। जब कोई निर्माण बिजली के नजदीक बन जाए तो, यही अधिकारी मकान मालिक को तमाम धाराओं में निरूद्ध करने का डर दिखाकर धन वसूली कर लेते हैं। ना मिलने पर पहले उसे नोटिस देंगे फिर ध्वस्त करने की कोशिश करते हैं। यह दोहरा मापदंड अपना कर हर तरफ से विभाग मात्र जनता को लूटने का काम कर रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि जब विभाग सरकारी है। तो बिजली उत्पादन से लेकर वितरण तक हर जगह निजीकरण है। मुद्दा ये है कि कहीं तार मकान को छू रहा है तो, कहीं तार टूटा पड़ा है। इस तरह के दर्जनों मामले इसी शहर में मौजूद है। लेकिन कहीं कोई कार्यवाई नहीं हो रही। कार्यवाई कौन करेगा।

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