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योगी की हाईटेक पुलिस से आगे निकले अपराधी, नौ अरब 54 करोड़ रुपये की लूट ले गए संपत्ति

लखनऊ। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनीं। सीएम योगी ने लखनऊ समेत कई शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू की। साथ ही पुलिस को हाईटेक करने के लिए जरूरी कदम उठाए। लेकिन अगर राजधानी की बात करें तो अपराधियों ने महज तीन साल में नौ अरब 54 करोड़ रुपये की संपत्ति लूट कर ले गए। लखनऊ पुलिस ने बदमाशों को पकड़कर उनसे बरामदगी भी की, लेकिन अभी भी 55 करोड़ 80 लाख रुपये की संपत्ति लोगों को वापस नहीं मिल सकी। ये अधिकारिक आंकड़ें वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक के हैं।

प्रदेश की सत्ता में आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को बेहतर हथियार मुहैया कराए। साथ ही अपराधियों पर लगाम कसने के लिए यूपी पुलिस को कई आधुनिक संसाधनों से लैस किया। साथ ही कई शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने के साथ ही पुलिस की संख्या में बढ़ोतरी की गई। हालांकि अभी भी हर रोज चोरी की घटनाएं हो रही हैं। बदमाश लूट, चोरी समेत कई वारदातों को हरदिन अंजाम दे रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में लूट के 122 मामले दर्ज किए गए। चोरों ने 415 घरों में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये के कीमती सामान पार कर दिए। बीते साल कुल 2221 चोरियों की एफआइआर दर्ज हुई। राजधानी में वाहन चोरी के मामले सबसे ज्यादा हैं। वर्ष 2021 में चोरों ने 1113 वाहन पार कर दिए। वर्ष 2018-19 में सर्वाधिक 2113 गाड़ियां चोरी हुईं, जबकि वर्ष 2019-20 में 1344 मामले दर्ज किए गए।

पुलिस वाहन चोरों को गिरफ्तार तो करती है, लेकिन उनके पास से बड़ी संख्या में चोरी की गाड़ियां बरामद नहीं कर पाती। वाहन चोर गिरोह नेपाल और बिहार में गाड़ियों को बेच देते हैं। कई बार चोरों की फुटेज भी पुलिस के पास होती है, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पाती। लखनऊ में वाहन चोरी के मामले सबसे ज्यादा सामने आए हैं। पुलिस भी अब चौराहों में पहले से ज्यादा मुस्तैद रहती है।

वाहन चोरी की सूचना देने पर डायल 112 की गाड़ी पहुंचती है। मौके का निरीक्षण कर पुलिसकर्मी थाने जाकर शिकायत करने की बात कहते हैं। पीड़ित थाने या संबंधित पुलिस चौकी पर जाते हैं तो उनसे प्रार्थना पत्र ले लिया जाता है। पहले एफआइआर दर्ज कराने के लिए पीड़ित को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट अथवा चार्जशीट की कापी लेने के लिए थाने का चक्कर काटना पड़ता है।

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