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अजय बिष्ट से योगी और फिर बेहतरीन प्रशासक बनने तक का सफर, राजनीति में समय-समय पर बदलता रहा ‘महाराज जी’ का किरदार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज यानि जून 2022 को 50वां जन्मदिन है। प्रदेश भर में उनका जन्मदिन अलग-अलग तरीकों से मनाया जा रहा है। हालांकि, उनके जन्मदिन की खास बात यह है कि वह खुद ही इसे नहीं मनाते, बल्कि उनके प्रशंसक और समर्थक ही धूम-धाम से उनका बर्थडे सेलीब्रेट करते हैं। इस खास दिन पर जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ का बचपन का सफर कैसा था। वह राजनीति में कब आए। संसद में क्यों एक मंहत के आंसू आंख से टपके। पांच साल तक सरकार चलाने के बाद उनका नाम बाबा बुलडोजर क्यों और किसने रखा। हम आपको ‘महाराज जी’ की जिंदगी से जुड़ी हर कहानी से रूबरू कराने जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमन्त्री पद की शपथ ली
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले गोरखपुर की गोरक्षपीठ से दीक्षा लेने वाले योगी आदित्यनाथ का राजनीति में समय-समय पर किरदार बदलता रहा। इस दौरान भी उन्होंने हर भूमिका को एक मिशन के रूप में लेकर सफलता के झंडे गाड़े। गोरखपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले योगी आदित्यनाथ ने नाथ संप्रदाय को भी काफी आगे बढ़ाया। गोरखपुर से 1998 से 2017 तक लोकसभा के सदस्य रहे योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमन्त्री पद की शपथ ली।

5 जून 1972 को हुआ था जन्म
उत्तराखंड के पंचुर, पौड़ी गढ़वाल में पांच जून 1972 को अजय सिंह बिष्ट का जन्म हुआ था। योगी आदित्यनाथ अपने भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर आते हैं। उनकी तीन बड़ी बहनें, एक बड़ा भाई और फिर वह हैं। वहीं उनके छोटे भाई भी हैं। . योगी आदित्यनाथ ने 1977 में टिहरी के गजा के स्थानीय स्कूल में पढ़ाई शुरू की। 1987 में दसवीं की परीक्षा पास की। 1989 में ऋषिकेश के श्री भरत मन्दिर इण्टर कालेज से इंटर की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। 1992 में श्रीनगर के हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी की परीक्षा पास की।

देश के सबसे युवा सांसद थे योगी
योगी आदित्यनाथ छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे और 1998 में गोरखपुर से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा में पहुंचे। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 26 वर्ष थी। वह देश के सबसे युवा सांसद थे। इसके बाद तो 2014 तक लगातार सांसद रहे। अप्रैल 2002 में इन्होंने हिन्दू युवा वाहिनी बनायी। 2004 में तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता। 2009 में दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2014 में पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर सांसद चुने गए।

19 मार्च 2017 को ली मुख्यमंत्री की शपथ
19 मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुना गया। योगी आदित्यनाथ ने रविवार, 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। योगी आदित्यनाथ ने पांच साल के कार्यकाल के दौरान प्रदेश से अपराधी, माफिया, खनन माफिया, राशन माफिया पर लगाम कसी तो वहीं धर्म और विकास पर फोकस किया। 2022 के चुनाव के वक्त उनका नाम बाबा बुलडोजर रखा गया।

37 वर्ष बाद फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता का स्वाद चखाया
बीजेपी के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने का रिकार्ड बनाने वाले योगी आदित्यनाथ ने अपने नेतृत्व में किसी भी दल को 37 वर्ष बाद फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता का स्वाद चखाया। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति पर काम करने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को विकास की राह पर सरपट दौड़ाने में कठिन समय में भी लगातार काम किया।

संसद में फूट फूटकर रोए थे योगी
सीएम योगी आदित्यनाथ एक समय संसद में रोए थे। संसद में रोते समय उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।. योगी को मुलायम सिंह की सरकार ने साल 2007 में 11 दिनों के लिए जेल भेजा था। इस घटना के बारे में लोकसभा के तत्कालीन स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने योगी से पूछा था। इसके बाद घटना और अपने ऊपर हुए हमले का जिक्र करते हुए योगी रोने लगे। योगी ने रोते हुए कहा था कि उनके खिलाफ ’राजनीतिक साजिश’ की जा रही है। योगी ने कहा था कि यदि संसद उनकी सुरक्षा नहीं कर सकती तो वह राजनीति छोड़ देंगे।

‘बुलडोजर बाबा’ पड़ा नाम
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, 2022 में अपराधियों और माफिया के खिलाफ ‘बुलडोजर’ चलाने का स्लोगन देकर बहुमत से सत्ता में लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके समर्थकों ने ‘बुलडोजर बाबा’ का नया नाम दिया है। प्रांतीय राजधानी लखनऊ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय जिला वाराणसी और योगी के अपने क्षेत्र गोरखपुर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में जीत से उत्साहित पार्टी कार्यकर्ताओं ने विजय जुलूस निकाला और ‘बुलडोजर बाबा जिंदाबाद’ का नारा लगाते हुए मुख्यमंत्री को नया नाम देते दिखे।

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