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हमीरपुर: कलयुग के कल्पवृक्ष की छाया में हर मनोकामना पूर्ण करने की शक्ति

काजल कश्यप, हमीरपुर

हमीरपुर जिले में एक सैकड़ों वर्ष पुराना वृक्ष, मुख्यालय से निकलने वाली यमुना नदी के समीप है। इस वृक्ष को लोग कल्पवृक्ष के नाम से जानते हैं। कल्पवृक्ष की मान्यता सनातन संस्कृति से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि वृक्ष के नीचे मन मांगी कामना पूरी हो जाती है। इस वृक्ष का इतिहास हिंदू धर्म के अनुसार, अनादिकाल से जुड़ा है। लोग अपनी मान्यता पूरी करने के लिए यहां आते हैं। यूपी के हमीरपुर जिले के जिला मुख्यालय में यमुना नदी के किनारे एक बहुत ही पुराना ऐतिहासिक वृक्ष, काफी वर्षों पहले यहां पर घना जंगल हुआ करता था। धीरे-धीरे क्षेत्र का विकास हुआ और वृक्ष की पहचान कल्पवृक्ष के रूप में की गई। बताया जाता है कि वृक्ष में भगवान गणेश के मुख जैसी आकृति होने से इसका महत्व और भी ज्यादा है। इस कल्पवृक्ष में फूल और फल तो होते ही हैं। लेकिन कोई बीज नहीं होता, जिस कारण इसका दूसरा पेड़ अत्यंत दुर्लभ हो जाता है। इस कल्प वृक्ष को पर्यटन विभाग भी कई बार देखने आ चुका है। कल्प वृक्ष की आयु पुराणों के अनुसार, सैकड़ों वर्ष बताई जाती है और स्थानीय लोगों की मानें तो, यह वृक्ष काफी समय से इसी प्रकार खड़ा है। बताया जाता है कि सैकड़ों वर्षो पूर्व देव काल में समुद्र मंथन के समय 74 रत्नों में यह अत्यंत प्राचीन कल्प वृक्ष निकला था। वैज्ञानिक तौर पर माना जाता है कि कल्पवृक्ष में सबसे अधिक ऑक्सीजन की मात्रा होती है। जिस कारण इसकी उपयोगिता और भी ज्यादा है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस प्राचीन वृक्ष कल्प वृक्ष के नीचे जो भी मनोकामना की जाती है, वह पूरी होती है। पुराणों के अनुसार यह वृक्ष इंद्रदेव के उद्यान में था। जिसे सत्यभामा के कहने पर पृथ्वी पर लाया गया था। कल्प वृक्ष को देखने दूर-दूर से लोग हमीरपुर आते हैं।

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