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181 साल से जार के अंदर बंद है इस खूंखार सीरियल किलर की खोपड़ी, 70 से ज्यादा बेगुनाह लोगों का कत्ल करने वाले कातिल की बड़ी दिलचस्प है कहानी

नई दिल्ली। वह बचपन से रईस बनने के सपने देखता था। घर की आर्थिक स्थित खराब होने के चलते शातिर के माता-पिता उसे पैसा नहीं देते, जिसके चलते वह अपने छोटे-भाई बहनों के साथ मारपीट करता। एकबार पिता ने सनकी बेटे की पिटाई कर दी तो वह घर से भागकर शहर आ गया। पहले छोटी-मोटी चोरी की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया। पैसा हाथ में आया तो उसने बेगुनाह लोगों का शिकार करना शुरू कर दिया। सनकी एक खूंखार सीरियल किलर बन गया। वह किसानों के साथ लूटपाट करता और पुल से फेंक देता। करीब 70 से ज्यादा लोगों का हत्यारा आखिरकार पुलिस के हत्थे लग गया। उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। सरकार ने किलर के सिर को धड़ से अलग कर एक खास जार में रख लिया, जो पिछले 181 साल से त्यों के त्यों रखा हुआ है।

पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में आज भी एक शख्स का सिर पिछले 181 साल से भी ज्यादा समय से जार में सुरक्षित रखा हुआ है। इस शख्स ने कोई ऐसा महान काम नहीं किया था, जिसके चलते उसका सिर जार में सुरक्षित रखा गया है। बल्कि ये शख्स उन खौफनाक सीरियल किलर्स में से एक था, जिसने न जाने कितने मासूम लोगों की बेरहमी से हत्या की थी। खूंखार किलर का नाम डियोगो एल्विस है। जिसका जन्म 1819 में स्पेन के गेसेलिया शहर में हुआ था। एल्विस के माता-पिता बहुत गरीब थे। एल्विस बचपन से सनकी था। परिवार के अलावा पड़ोसियों के साथ मारपीट करता। लोगों के घरों में चोरी करता। जिसके कारण उसके पिता ने एल्विस को घर से निकाल दिया।

एल्विस घर से भागकर पुर्तगाल के लिस्बन पहुंचा। यहां एल्विस, भीड़-भाड़ वाले इलाकों में लूटपाट की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया। वह अक्सर भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाता और लूटपाट की घटनाओं के अंजाम देता। एल्विस के मन में और पैसा कमाने का लालच आया। एक रिसर्च में डियोगो ने पाया कि लिस्बन में 213 फुट ऊंचा एक पुल है। इस पुल के जरिए ही आउटर एरिया में जाया जाता है।. इस पुल का इस्तेमाल खेती-बाड़ी करने वाले किसान ज्यादा किया करते हैं। वे लोग आउटर एरिया से शहर आते हैं। वहां फल-सब्जियां बेचकर शाम को इसी पुल से वापस घर लौट जाते हैं।

किसानों पर एल्विस अचानक से टूट पड़ता। फिर सारे पैसे लूटकर किसान को पुल से धक्का देकर नीचे फेंक देता। उसे पूरा यकीन था कि 213 फुट की ऊंचाई से गिरने के बाद किसान की मौत होना तय है। इसी तरह डियोगो ने उसी पुल को अपना ठिकाना बना लिया। वह रोज घात लगाकर वहां बैठ जाता। फिर अकेले जा रहे किसान को लूटकर इसी तरह मार डालता। वह रोज लूटपाट की घटना को अंजाम नहीं देता। लूट में उसे पैसा ज्यादा मिल जाता तो वह उन पैसों से कुछ दिन अपना खर्चा चलाता और लूट की घटना को कुछ समय के लिए विराम दे देता। एक महीना गुजरा तो इलाके में बात फैलनी शुरू हो गई कि काफी किसान जो लिस्बन जाते हैं वो गायब हो रहे हैं। बात लिस्बन तक भी फैल गई। तब करीब 25 से 30 किसान गायब हो चुके थे। पुलिस ने जांच शुरू की तो करीब 50 किसानों को एल्विस ने अपना शिकार बना चुका था।

पुलिस ने गुमनाम कातिल की तलाश शुरू कर दी। बात डियोगो तक भी पहुंची तो उसने सोचा कि कुछ समय तक इस काम को विराम दे दिया जाए। तीन साल तक डियोगो ने कुछ नहीं किया। चौथे साल में डियोगो ने एक गैंग बनाकर फिर से लूट की घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया। एल्विस, गैंग के साथ पहले रैकी करता, फिर लूट की घटना को अंजाम देकर उस घर में रहने वाले लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतारकर फरार हो जाता। पूरे शहर में अब ये बात भी फैलने लगी कि रईस लोगों के घर लूटपाट के बाद उन्हें मार दिया जा रहा है। पुलिस ने गुमनाम कातिल की खोज शुरू की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

इसी दौरान डियोगो ने लिस्बन के मशहूर डॉक्टर को अपना निशाना बनाया। लूट के बाद किलर ने डॉक्टर समेत परिवार के 4 लोगों को बेरहमी से मार डाला। डॉक्टर के कत्ल की बाद आग की तरह फैल गई। पुलिस पर अब ऊपर से प्रेशर आ गया कि आरोपियों को किसी भी हाल में पकड़ना है। पुलिस ने 4-5 संदिग्धों को पकड़ा। उनसे सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इन सभी में डियोगो एल्विस भी था जो कि पुलिस के सामने बिल्कुल खामोश खड़ा था। पूछताछ में पता चलता है कि गैंग का सरदार डियोगो ही है।

एल्विस ने पुलिस को बताया कि, 50 किसानों के अलावा 20 अन्य लोगों के नाम बताए। जिनकी लूटपाट के बाद उसने हत्या की थी। एल्विस ने पुलिस को बताया कि, 70 के आगे भी उसने कईयों का मारा, लेकिन उनका नाम उसे पता नहीं। फरवरी 1841 में डियोगो को फांसी पर लटका दिया गया। फांसी के बाद लिस्बन में कुछ डॉक्टर्स ने कोर्ट और सरकार से मौत के बाद डियोगो के दिमाग को रिसर्च के लिए अपने पास रखने की परमिशन मांगी। डॉक्टर्स का कहना था कि ऐसे सीरियल किलर्स की सोच कैसी होती है। इसे साइंस की टर्म में फ्रेनोलॉजी कहा जाता है। कोर्ट और सरकार ने डॉक्टर्स को इस बात की अनुमति दे दी। फांसी के बाद एल्विस के सिर को धड़ से अलग किया गया। रिसर्च के बाद डियोगो के सिर को यूनिवर्सिटी ऑफ लिस्बन के म्यूजियम में रखा गया। आज इस बात को 181 साल हो गए हैं.।

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