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सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस केस में कहा- जासूसी की बात का सरकार ने नहीं किया खंडन,इसलिए जांच जरूरी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पेगासस जासूसी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुना दिया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेगासस जासूसी केस की जांच एक्सपर्ट कमेटी करेगी। Supreme Court ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि लोगों की जासूसी किसी भी तरह से पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती और इस केस में केंद्र सरकार का कोई साफ स्टैंड नहीं था। निजता के उल्लंघन की जांच होनी चाहिए। इस मामले का कमेटी जांच करके रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी। कोर्ट 8 हफ्ते बाद इस केस पर फिर सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस केस पर कहा कि इस पर केंद्र ने कोई विशेष खंडन नहीं किया है। इस प्रकार हमारे पास याचिकाकर्ता की दलीलों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करने के अलावा कोई उपाय नहीं है। हम एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त करते हैं जिसका कार्य सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक्सपर्ट कमेटी को आरोपों की पूर्ण रूप से जांच करने और अदालत में  रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसी के साथ ही मामले की सुनवाई 8 सप्ताह के बाद तय कर दी है। बता दें कि एक्सपर्ट कमेटी में तीन सदस्य होंगे और तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरवी रवींद्रन करेंगे। वहीं अन्य सदस्य आलोक जोशी और संदीप ओबेरॉय होंगे।

13 सितंबर को इस मामले पर चीफ जस्टिस एनवी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह सिर्फ यह जानना चाहती है कि क्या केंद्र ने नागरिकों की कथित जासूसी के लिए अवैध तरीके से पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया है या नहीं, पीठ ने मौखिक टिप्पणी की थी कि वह इस मामले की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञ समिति का गठन करेगी। 

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