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Himachal Assembly Elections : ‘राष्ट्रवाद का तड़का’ के साथ हिमाचल में बीजेपी ने चला समान नागरिक संहिता का दांव, जानिए क्या है UCC, किसके दम पर कमल का फूल खिलाने जा रहे ‘भगवाधारी’

नई दिल्ली। उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता का दांव चला था। उसके लिए कमेटी का ऐलान किया था। ठीक उसी तर्ज पर अब बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। जिसमें विकास के साथ ही राष्ट्रवाद का तड़के के अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किए जाने का ऐलान किया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि, यूसीसी के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाएगा।

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है। राजनीतिक दल मतदताओं को अपने-अपने पाले में लाने के लिए लोकलुभावन वादे कर रहे हैं। इसीबीच बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश के लिए अपने घोषणा पत्र का ऐलान कर दिया है। जेपी नड्डा ने शिमला में अपने संकल्प पत्र को घोषित करने के साथ-साथ महिलाओं के लिए भी 11 संकल्पों का अलग घोषणापत्र जारी किया। बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो को संकल्प पत्र का नाम दिया है। अपने संकल्प पत्र में बीजेपी ने 11 वादे किए हैं.। घोषणापत्र जारी करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि हिमाचल में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाएंगे। इसके लिए एक्सपर्ट्स की एक कमेटी बनाई जाएगी। इसके साथ ही वक्फ संपत्तियों का सर्वे किया जाएगा। इनके अवैध उपयोग की जांच कराई जाएगी।

इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात की बीजेपी सरकारों ने अपने-अपने राज्यों में यूसीसी लागू करने के लिए ऐसी घोषणा की थी। इसके साथ ही बीजेपी शासित कई और राज्यों के मुख्यमंत्री भी यह कह चुके हैं कि हम इसे कानून के दायरे में ला सकते हैं इसको देखा जा रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया है। 29 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में सीएम पटेल ने यह फैसला लिया था। समिति का गठन हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में किया जाएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए कमेटी बनाने का फैसला ऐसे वक्त लिया है जब राज्य में जल्द विधानसभा का चुनाव होने वाला था।

बता दें कि इसी साल 27 मार्च को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समान नागरिक संहिता को लेकर पांच सदस्यीय समित का गठन किया था। समिति ने समान नागरिक संहिता पर रायशुमारी के लिए आठ सितंबर को वेबसाइट लॉन्च की थी। इसके अलावा, लोगों से डाक और ईमेल के माध्यम से भी सुझाव मांगे गए थे। उत्तराखंड में समिति को लिखित रुप से मिले सुझावों की संख्या साढ़े तीन लाख से ज्यादा बताई जा रही है। डाक, ईमेल और ऑनलाइन सुझावों की मिलाकर यह संख्या साढ़े चार लाख से ज्यादा बताई जा रही है। समिति से छह महीने में रिपोर्ट सीएम को सौंपने के लिए कहा गया था।

गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने भी समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था। इसमें कहा गया कि केंद्र सरकार संसद को समान नागरिक संहिता पर कोई कानून बनाने या उसे लागू करने का निर्देश नहीं दे सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने, विवाह, तलाक, रखरखाव और गुजारा भत्ता को विनयमित करने वाले व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता की मांग की गई थी। केंद्र सरकार ने इसी याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया था।

यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ सीधे शब्दों में समझें तो भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून चाहे वह किसी भी धर्म और जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड सभी धार्मिक समुदायों पर लागू होने के लिए एक देश एक नियम का आह्वान करता है।

 

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