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जानिए कौन है राजनीति के ‘चाणक्य’ का भरोसेमंद साथी ‘कटप्पा’ जिसने यूपी की सियासी जमीन से सपा-बसपा और कांग्रेस का किया सफाया, अब साउथ में कमल खिलाने के लिए हुआ रवाना

लखनऊ। देश की राजनीति में गृहमंत्री अमित शाह को राजनीति ‘चाणक्य’ के नाम से नमाजा जाता है। जिन्होंने वह कर दिखाया, जिसके बारे में कभी कोई सपने में भी नहीं सोंच सकता था। 2014 से लेकर 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत हुई। पर ये काम अकेल अमित शाह नहीं कर सकते थे। इसके पीछे उनके दाहिने हाथ संगठन मंत्री सुनील बंसल (कटप्पा) का अहम रोल रहा। इसी लिए सुनील बंसज को द मैन ऑफ विजन मिशन कहा जाता है। यूपी में सपा-बसपा और कांग्रेस की सियासी जमीन को जमींदोज करने के बाद अब सुनील बंसल को दक्षिण की जिम्मेदारी दी गई है।

असल शिल्पकार सुनील बंसल
नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने में जितना हाथ गृहमंत्री अमित शाह का रहा है तो उतना ही अहम रोल यूपी संगठन मंत्री सुनील बंसल का भी था। उत्तर प्रदेश में खत्म हो चुकी बीजेपी को अमित शाह की रणनीति ने दोबारा जिंदा किया। पीएम नरेंद्र मोदी को 2014 में केंद्र की सत्ता पर बिठाया। उसके बाद यूपी में बीजेपी का 2017 में परचम लहराया। फिर से 37 साल बाद दोबारा बीजेपी की सत्ता में 2022 में वापसी करवाई। इतना ही नहीं 2019 में केंद्र में मोदी सरकार की वापसी करा कर अमित शाह ने अपने रणनीतिक कौशल का लोहा सबको मनवाया। लेकिन कम लोग जानते हैं कि अमित शाह की इस कामयाबी के पीछे असल शिल्पकार सुनील बंसल ही थे। अमित शाह के भरोसेमंद सुनील बंसल को जो टॉस्क दिया गया, उसे उन्हें सौ फीसदी पूरा करके दिखाया।

9 साल के बाद यूपी से विदाई
सुनील बंसल यूपी की सियासत का वह नाम है जिसका जिक्र आते ही एक सफल रणनीतिकार एक कुशल प्रबंधन करता और एक शांत चित्त राजनेता की इमेज उभर कर सामने आ जाती है। 9 साल की लंबी पारी खेलने के बाद आखिरकार यूपी से सुनील बंसल की विदाई हो गई। अब सुनील बंसल को संगठन से सीधे पार्टी में लिया गया है। सुनील बंसल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किए गए है। यानी सीधे तौर पर अध्यक्ष के बाद दूसरी पोजीशन पर। इतना ही नहीं बंसल के कद का अंदाजा आपको इस बात से ही लग जाएगा कि उनके प्रमोशन के लेटर के साथ ही उन्हें 3 राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ये तीन राज्यों की दी गई जिम्मेदारी
सुनील बंसल ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल, केसीआर के तेलंगाना और पटनायक के उड़ीसा में प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। सुनील बंसल के जरिए अब बीजेपी मिशन साउथ को सफल बनाने का काम पर जुट गई है। जानकारों का मानना है कि सुनील बंसल की पकड़ संगठन के अलावा जमीनी कार्यकर्ताओं में अच्छी है। वह सियासत की नब्ज को पकड़ लेते हैं। यही कारण रहा कि, 2017 के बाद से कानपुर-बुंदेलखंड की 52 सीटों पर बसपा-कांग्रेस का सफाया हो गया। वहीं 2019 के लोकसभा में 10 में 10 सीटों पर कमल का फूल खिलाफ मुलायम के गढ़ पर सुनील बंसल की रणनीति के चलते बीजेपी को प्रचंड जीत मिली।

राजस्थान में हुआ था सुनील बंसल का जन्म
20 सितंबर 1969 को राजस्थान में जन्मे सुनील बंसल बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं। बंसल का संघ और भाजपा से बचपन से ही जुड़ा हो रहा अपने छात्र जीवन में इन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर राजनीति का ककहरा सीखा। 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय एबीवीपी से राष्ट्रीय महासचिव चुने गए उसके बाद सुनील बंसल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

2014 में बनाए गए थे सह प्रभारी
2014 ने अमित शाह के साथ सह प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने वाले सुनील बंसल में बीजेपी को शहरों की पार्टी के टैग से मुक्त कर उसके 5 करोड़ कार्यकर्ता जोड़ने का सफल प्रयोग किया । पंचायत चुनावों में बीजेपी को सिंबलके साथ एंट्री करवाई और उसे गांव तक पहुंचाया। जिसके बाद बीजेपी ने यूपी में सफलता की सीढयां चढ़ना शुरू किया और अब बीजेपी नच में अपराजेय बन चुकीं है।

इस वजह से साउथ की दी गई जिम्मेदारी
इसके बाद अब अमित शाह का मिशन है दक्षिण में कमल खिलाना का है। जिसके लिए सुनील बंसल को अब दक्षिण की कमान सौंपी गई है। क्योंकि ममता और केसीआर के गढ़ को भेदने के लिएं सुनील बंसल जैसे रणनीतिकार की ही जरूरत है। जानकारों का मानना है कि 2024 को लेकर जिस तरह से बीजेपी ने साउथ की जिम्मेदारी सुनील बंसल को दी है। इससे पार्टी को फाएदा होगा। क्योंकि, सुनील बंसल बूथ, मंडल, ब्लॉक और पन्ना प्रमुखों के साथ मिलकर बीजेपी की जीत की नींव रखते हैं।

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