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महिलाओं ने खाली खेतों में गाए गीत मल्हार, इंद्रदेव को प्रसन्न करने को चलाया हल, मौसम विभाग के साइंटिस्ट ने बताया इस वजह से रूठा मानसून

कानपुर। देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश हो रही है और वहां बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मानसून इस कदर रूठा है कि आषाढ़ का महीना बीत जाने के बाद अब सावन माह की शुरुआत हो चुकी है, पर आसमान से एक बूंद नहीं टपकी। ऐसे में मेघों को मनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके लिए तरह तरह के टोटके अपनाए जा रहे हैं। कहीं खेतों पर हल लेकर महिलाएं उतर रही हैं तो कहीं दरवाजे-दरवाजे जाकर युवा और बच्चे लेदा मांग रहे हैं। इसके पीछे इंद्रदेव को प्रसन्न करना है ताकि बारिश की शुरुआत हो जाए।

सूखे के बने आसार
प्रदेश के कुछ हिस्सों में जोरदार बारिश शुरू हो चुकी है, लेकिन कानपुर, इटावा, फतेहपुर, कन्नौज के अलावा बुंदेलखंड में बारिश न होने के चलते सूखे के आसार बन रहे हैं। भीषण गर्मी और उमस से जहां आम जनमानस परेशान है, तो वहीं बारिश नहीं होने से अन्नदाता आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए है। पूरे आषाढ़ बारिश न होने के बाद सावन से लोग आस लगाए हैं। सावन के पहले दिन गुरुवार को भी धूप-छांव का खेल चलता रहा, लेकिन बदरों ने तरस नहीं खाया। गुरुवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री तो न्यूनतम 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। अब बारिश के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं टोटके कर रही हैं।

भतौरा गांव में महिलाओं ने चलाया हल
इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए इटावा जनपद के जसवंतनगर इलाके में भतौरा गांव में महिलाओं ने सूखे पड़े खेतों में हल चलाकर और गीत मल्हार गाकर रूठे हुए बादलों को मनाने के लिए खेतों में हल चला रही हैं। महिला शकुंतला देवी ने बताया कि इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए हल चलाया जा रहा है, जिससे कि बारिश हो सके और हमारी फसलें बच सकें। वहीं, कई जगह बच्चे लेदा मांगते दिखाई पड़ रहे हैं। इसमें नगर या गांव के कुछ बच्चे घर घर जाकर गाना गाते हैं कि लेदा-लेदा पानी दे, कारे मेघा पानी दे, पानी दे फिर धानी दे।

इस वजह से महिलाओं ने चलाया हल
किताबों की कहानियों में पढ़ा और सुना भी गया है कि प्राचीन काल में सूखे के हालात बनने पर राजा और रानी मिलकर खेतों में हल चलाकर बारिश के लिए अनुष्ठान करते थे। राजा जनक ने भी महारानी के साथ खेत में हल चलाया था, जब धरती मां की गोद में माता सीता को पाया था। इंद्रदेव को प्रसन्न करने की इस परंपरा के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूखे के हालात बनने पर महिलाएं खेतों में हल चलाती हैं।

क्या है लेदा मांगने की परम्परा
गांवों में बारिश न होने पर लेदा मांगने की भी प्रथा प्रचलित है। इसमें गांवों में युवाओं और बच्चों की टोली घरों के बाहर दरवाजे पर जाती है। यह टोली गीत गाती है पानी दे गुणगानी दे… और मल्हार भी करती है। यह टोली घरों के बाहर जमीन पर लोटपोट होती है और परिवार उसपर बाल्टी या घड़े से पानी डालता है। कीचड़ से सनी ये टोली पूरे गांव में घूमकर घरों में पानी की मांग करती है। बुजुर्ग बताते हैं कि ये परंपरा वर्षों पुरानी है, इस टोटके से इंद्र देव को हमारी हालत पर दया आ जाती है और वो बारिश कराते हैं।

जानिए क्यों नहीं बरसे मेघ
इस बार यूपी में मानसून के रूठने से किसानों के हाल बेहाल हैं। सात साल पहले की तरह ट्रफ रेखा के बदल जाने से यूपी में अबतक तेज बारिश नहीं हो सकी है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो मानसून की दो शाखाएं बारिश कराती हैं। एक शाखा अरब सागर से चलती है जो देश के दक्षिण में बारिश कराती है और दूसरी शाखा बंगाल की खाड़ी से उठकर यूपी में वर्षा कराती है। इस बार मानसूनी शाखा को उत्तर भारत की ओर उचित वायु दाब न मिलने से आने वाली शाखा दिशा से भटक रही है, इससे मानसून ठिठक गया है। ऐसे सूखे जैसे हालात बनने के आसार पैदा हो गए हैं। खेत में धान की पौध सूखने लगी है और खेतों को नमी न मिलने से जुताई की भी स्थिति नहीं बन रही है।

 

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