Notice: Undefined property: AIOSEO\Plugin\Common\Models\Post::$options in /home/customer/www/astitvanews.com/public_html/wp-content/plugins/all-in-one-seo-pack/app/Common/Models/Post.php on line 104
dir="ltr" lang="en-US" prefix="og: https://ogp.me/ns#" > कानपुर में जिंदा मानकर लाश के साथ डेढ़ साल से सो रहा था एक परिवार, इनकम टैक्स के चलते रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले से पर्दा उठा तो मच गया हड़कंप - Astitva News
बड़ी ख़बरें
कौन है वो Nukush Fatima जिसकी एक गुहार में Cm Yogi ने प्रशासन की लगा दी क्लास और 24 घंटे में वो कर दिया जो 20 सालों में नही हो पाया !अब फातिमा का परिवार Yogi को दे रहा है दुआएं !आज पूरा देश #RohiniAcharyaको कर रहा है सलाम,Lalu की बेटी ने अपनी किडनी देकर पिता को दी नई जान !Gujrat के बेटे ने बदल दी सियासी बाजी ,सातवीं बार फिर गुजरात में खिलेगा कमल Congress के बयानवीरों ने फिर डुबोई कांग्रेस की लुटिया !Irfan Solanki News : कानून के शिकंजे से घबराए इरफान सोलंकी ने भाई समेत किया सरेंडर, पुलिस कमिश्नर आवास के बाहर फूट-फूट कर रहे विधायक, जानें किन धाराओं में दर्ज है FIRPM Modi Roadshow : गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचंड मतदान के बाद पीएम नरेंद्र मोदी का मेगा रोड शो, 3 घंटे में 50 किमी से अधिक की दूरी के साथ ‘नमो’ का विपक्ष पर ‘हल्लाबोल’‘बाहुबली’ पायल भाटी ने ‘बदलापुर’ के लिए रची हैरतअंगेज कहानी, हेमा का कत्ल करने के बाद पुलिस से इस तरह बचती रही बडपुरा गांव की ‘किलर लेडी’Gujarat Assembly Election 2022 : गुजरात में है आजाद भारत का ऐसा पोलिंग बूथ, जहां सिर्फ एक वोटर जो 500 शेरों के बीच करता वोट, लोकतंत्र के त्योहार की बड़ी दिलचस्प है स्टोरीगुजरात में किस दल की बनेगी ‘सरकार’ को लेकर जारी है मदतान, रवींद्र जडेजा की पत्नी समेत इन 10 दिग्गज चेहरों के साथ मोरबी हादसे में नायक बनकर उभरे इस नेता पर सबकी नजरGujarat Assembly Election : गुजरात में भी है मिनी अफ्रीका, जहां पहली बार मतदान कर रहे मतदाता, बड़ी दिलचस्प है यहां की गाथाGujrat Election 2022: योगी मॉडल का गुजरात में बज रहा है डंका . Modi के बाद Yogi की सबसे ज्यादा डिमांड

कानपुर में जिंदा मानकर लाश के साथ डेढ़ साल से सो रहा था एक परिवार, इनकम टैक्स के चलते रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले से पर्दा उठा तो मच गया हड़कंप

कानपुर। शहर के रावतपुर स्थित कृष्णापुरी इलाके में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक फैमिली पिछले डेढ़ साल से लाश के साथ रह रही थी। पत्नी समेत पूरा परिवार लाश की देखरेख करता था। इतना ही नहीं अस्पताल की तरफ से अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया, लेकिन, मृतक के माता-पिता को लग रहा था कि उनका बेटा मरा नहीं, बल्कि कोमा में है और वह जिंदा है।

क्या है पूरा मामला
कृष्णापुरी निवासी विमलेश कुमार आयकर विभाग में असिस्टेंट ऑफिसर पद पर अहमदाबाद में तैनात थे। कोविड की दूसरी लहर के दौरान उनकी हालत बिगड़ी तो परिजन लखनऊ और फिर कानपुर लेकर आए। 22 अप्रैल 2021 को बिरहाना रोड के मोती हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया। 23 अप्रैल को परिजन विमलेश का अंतिम संस्कार करने जा रहे थे तो उन्हें शरीर में हरकत का एहसास हुआ। परिजनों ने हाथ में ऑक्सीमीटर लगाया तो पल्स रेट और ऑक्सीजन लेवल बताने लगा। तब परिवार ने अंतिम संस्कार करने की बजाए फिर विमलेश को दूसरे हॉस्पिटल में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कमरे का 24 घंटे एसी ऑन रहता था
इसपर परिवार वाले उनका शव लेकर घर आ गए थे। इसके बाद एक कमरे के बेड पर लिटा दिया। बाकएदा एसी-कूलर की व्यवस्था की गई। इतना ही नहीं मृतक की पत्नी ने परिवार के अन्य सदस्यों को विमलेश के जिंदा होने का विश्वास दिलाया। परिवार वाले उनके शव पर रोजाना गंगाजल डालकर जिंदा होने का दावा करते रहे थे। इसके बाद से विमलेश की बैंक अफसर पत्नी मिताली, पिता राम अवतार, मां और साथ में रहने वाले दो भाई दिनेश और सुनील शव की सेवा में लग गए। सुबह-शाम शव की डेटॉल से सफाई, तेल मालिश, रोजाना कपड़े और बिस्तर बदलना। कमरे का 24 घंटे एसी ऑन रखना चलता रहा।

तो परिवार कह देता था कि विमलेश कोमा में हैं
यानी डेढ़ साल तक शव की ऐसी केयर की कि पड़ोसियों को बदबू तक नहीं आई। जब कभी पड़ोसी पूछते तो परिवार कह देता था कि विमलेश कोमा में है। क्योंकि, परिवार थोड़ा रिजर्व रहता था। ऐसे में पड़ोसी और बाहरी लोगों से ज्यादा संपर्क नहीं था। यह सिलसिला डेढ़ साल तक चलता रहा। परिवार इस दौरान शव को घर में रखे रहा। आयकर विभाग की टीम उनकी जांच करने घर पहुंची तो पूरे मामले की खुलासा हुआ। जांच के लिए एडिशनल सीएमओ डॉ. गौतम टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को भरोसे में लिया कि अगर जिंदा है तो उनका इलाज हैलट में किया जाएगा। इसके बाद विमलेश के शव को अस्पताल लाए और जांच के दौरान मृत घोषित कर दिया।

बिल्कुल ममी की तरह हो गया था शव
शव से जो भी सड़ने की प्रक्रिया के दौरान पानी निकला बिस्तर बार-बार बदलने के चलते शरीर पर सड़न नहीं पैदा हो सकी। वहीं, दूसरी तरफ शरीर को रोजाना डेटॉल जैसे लिक्विड से साफ करके तेल मालिश तक की जा रही थी। इससे बाहर से बैक्टीरिया पनप नहीं सके। इन सब प्रक्रिया के बीच शरीर पूरी तरह से सूखकर अकड़ गया। बिल्कुल ममी की तरह हो गया। इस तरह डेढ़ साल तक परिवार वाले शव को घर में रखे रहे। डॉक्टर गौतम ने बताया कि विमलेश बेहद दुबले-पतले थे। एक महीने की बीमारी के दौरान शरीर और टूट गया था। शव को जब बिस्तर पर परिजनों ने रखा था तो रोजाना बिस्तर और कपड़ा बदला जा रहा था। कमरे में एसी लगा था, इसके चलते सड़न पैदा नहीं हुई।

मृत शरीर की हालत बेहद खराब
पड़ोसियों की डेढ़ साल से घर के अंदर रखे जाने की जानकारी हुई तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर पुलिस घर आई तो हंगामा खड़ा हो गया। घरवाले पुलिस से पत्नी की हालत ठीक नहीं होने की दुहाई देकर शव न ले जाने की बात कहते रहे। मृत शरीर की हालत बेहद खराब हो चुकी है और मांस हड्डियों में ही सूख गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है की पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए उनसे पति के बीमार होने की जानकारी देकर स्वास्थ्य कर्मियों को बुलाकर शव को एलएलआर अस्पताल भिजवाया गया।

आक्सीजन सिलेंडर भी घर पर लाए जाते थे
पुलिस ने पूछताछ की तो कुछ पड़ोसियों ने कहा कि उन्हें तो यही विश्वास था कि विमलेश जिंदा हैं और कोमा में हैं। डेढ़ साल से रोजाना घर पर आक्सीजन सिलेंडर भी घर पर लाए जाते थे। इसलिए कभी उन्हें उनकी मौत का आभास नहीं हुआ और पुलिस को भी जानकारी देना उचित नहीं समझा। सीएमओ डॉक्टर आलोक रंजन ने बताया कि आयकर विभाग के कर्मचारी हैं। मृत्यु प्रमाणित न होने की वजह से पारिवारिक पेंशन का निर्धारण नहीं हो पा रहा था। इसलिए आयकर विभाग ने सीएमओ से जांच कराकर रिपोर्ट देने का आग्रह किया था। उनके आग्रह पर सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। घरवाले विरोध कर रहे थे, इसलिए पुलिस बुलानी पड़ी। उनकी मृत्यु डेढ़ वर्ष पहले ही हो चुकी है। जांच कमेटी की रिपोर्ट शाम तक आएगी। उसके आधार पर आयकर विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

एक-एक बिंदु पर जांच की जा रही
कानपुर पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने बताया कि इस मामले में एडिशन सीएमओ के निर्देशन में डॉक्टरों की टीम ने जांच की है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अंधविश्वास के कारण परिवार ने शव को तो सुरक्षित नहीं रखा था। शव पर कोई केमिकल या अन्य रसायन आदि के लेप लगाकर सुरक्षित तो नहीं किया गया था। एक-एक बिंदु पर जांच की जा रही है। कोई आपराधिक मामला नहीं था। इसलिए परिजनों के प्रार्थना पत्र देने पर बगैर पोस्टमॉर्टम कराए शव उनके सुपुर्द कर दिया गया। अब उन्हें शव का अंतिम संस्कार करने का निर्देश दिया गया है।

Related posts

Leave a Comment

अपना शहर चुने

Top cities