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यूपी के इस कस्बे में मिली त्रेतायुग की प्राचीन जेल, जिसका लव-कुश ने करवाया था निर्माण, गिरफ्तारी के बाद यहीं पर कई दिनों तक बंद रहे थे श्रीराम भक्त हनुमान

कानपुर। शहर से 18 किमी की दूरी पर स्थित बिठूर कस्बा है। कहा जाता है कि, भगवान श्रीराम ने जब मां सीता को देश निकारा दिया था तो वह लखनऊ के रास्ते उन्नाव होते हुए महर्षि वाल्मीकि के आश्रृम में पहुंची थीं। मां सीता ने यहीं पर लव-कुश को जन्म दिया था। दोनों पुत्रों को महर्षि वाल्मीकि ने शिक्षा-दिक्षा दी थी। युद्ध के दौरान लव-कुश ने प्रभुराम भक्त हनुमान को बंदी बना लिया था और यहीं पर एक जेल के अंदर रखा था। तभी से बजरंगबली आज भी सलाखों के पीछे हैं और शनिवार-मगंलवार के दिन भक्त पूजा-पाठ कर मन्नत मांगते हैं।

बिठूर में ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर
उत्तर प्रदेश के जिलो में अनेक प्राचीन मंदिर और पौराणिक धार्मिक स्थल मौजूद हैं। अयोध्या और काशी, मथुरा के अलावा भी कई ऐसे पौराणिक धार्मिक स्थल हैं जिनका अपना महत्व है। कानपुर जनपद के बिठूर में मां सीता, लव-कुश के अलावा बजरंगली का प्राचीन मंदिर के साथ ब्रम्हकुटी के साथ ध्रुव टीला है। जहां हरदिन सैकड़ों भक्त आते हैं और मां गंगा में स्नान के बाद देवताओं के दर्शन के साथ मन्नत मांगते हैं। बिठूर में मां सीता के पदचिन्ह के निशान आज भी मौजूद हैं। मान्यता के अनुसार आदिकवि महर्षि वाल्मिकी का आश्रम था और लव-कुश का जन्म भी यहीं हुआ था। महर्षि वाल्मिकी से लव-कुश ने शिक्षा-दीक्षा ली थी।

युद्ध के बाद बजरंगबली को बनाया बंदी
बताया जाता है कि, भगवान राम के यज्ञ का अश्व जब वाल्मीकि के आश्रम पहुंचा उसे लव और कुश ने उसे पकड़ लिया। यज्ञ के अश्व की रक्षा के लिए साथ गए रामभक्त हनुमान से लव -कुश की लड़ाई हुई। दोनों बालकों का तप देखकर हनुमान जी को पता चल गया कि वो प्रभु राम के बेटे हैं और उन्होंने आत्मसर्पण कर दिया। लव-कुश उन्हें लेकर आश्रम पहुंचे और एक कोठरी में बंद कर दिया था। ये बंदीगृह आज भी यहां मौजूद है, जहां रामभक्त बजरंगबली की प्रतिमा विराजी है। जेलनुमा मंदिर में विराजमान हनुमान जी के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है।

बजरंगबली की मूर्ति स्थापित
जिस बंदीगृह में रामभक्त हनुमान को बंदी बनाकर रखा गया था, वहां पर अब छोटा सा मंदिर है और बजरंगबली की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के पुजारी रामप्रकाश शुक्ल ने बताया कि अंग्रेजों ने जब नानाराव पेशवा के महल पर हमला बोला तो उन्होंने इस धार्मिक स्थल पर भी गोले बरसाए। कई मंदिरों को तोड़ दिया गया, लेकिन मां सीता, लव-कुश, वाल्यमीकि आश्रम और हनुमान बंदीगृह पर अंग्रेजों की नजर नहीं पड़ी। मंदिर का निर्मण किसने कराया, ये किसी को नहीं पता। पुजारी ने बताया कि बंदीगृह के द्धार सुबह छह बजे खुलते हैं और शाम पांच बजे बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान पुजारी बंदीगृह के बाहर बहरेदारी भी देते हैं।

हर मनोकामना पूरी करते हैं बजरंगबली
मान्यता है कि मंगलवार और शनिवार को जो भी भक्त यहां आकर मन्नत मांगता है उसकी मनोकामना भगवान बजरंगबली पूरी करते हैं। पुजारी की मानें तो बजरंगबली भगवान बिछड़ों को मिलवाते हैं। जो भी भक्त पांच मंगलवार यहां आकर माथा टेकता है तो उसके अपने मिल जाते हैं। पुजारी ने कहा कि बिठूर किदंवतियों से भरा कस्बा है। यहां पग-पग पर भगवान राम का अहसास होता है। लेकिन सरकारों की उपेक्षा के चलते इसका देश-दुनिया में नाम नहीं हो सका। पुजारी बताते हैं कि, जब 2017 में योगी सरकार आई तो बिठूर में कुछ कार्य हुआ। लेकिन अब हालात फिर से पहले जैसे हो गए हैं।

तेत्रायुग की सीता रसोई
मंदिर के पुजारी रामप्रकाश शुक्ल बताते हैं, कि जिस कमरे में मां सीता ठहरीं व जहां भोजन पकाती थीं वो आज भी त्यों का त्यों मौजूद है। पुजारी के मुताबिक मां तेत्रायुग की सीता रसोई और बर्तन मंदिर परिसर में रखे हुए हैं। इसके अलावा जहां पर लव-कुश को महर्षि वाल्मीकि शिक्षा के साथ लड़ाई के हुनर सिखाते थे, वह जमीन भी मौजूद हैं। पुजारी बताते हैं कि जहां पर महर्षि वाल्मीकि ने बैठकर रामायण लिखी थी, वह वृक्ष कुछ साल पहले आंधी के कारण ढह गया था, लेकिन उसकी जड़ों से नए पौधे फिर से निकलने शुरू हो गए हैं।

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