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14 साल के बाद माफिया के गढ़ में दाखिल हुआ डॉन, भय से खौफजदा मुख्तार और बीकेडी ‘पहलवान’

लखनऊ। एक वक्त था, जब पूर्वांचल में माफिया-डॉन की तूती बोला करती थी। गरीबों कह जमीनों पर कब्जे के साथ सरकारी ठेकों को लेकर अक्सर इनके बीच गैंगवार हुआ करती थी। इन्हीं में से एक डॉन बृजेश सिंह था, जो 14 साल के बाद जेल से बाहर आया है। डॉन के परिवारवाले और उसके करीबी खुश हैं तो वहीं विरोधी खेमे में हलचल बढ़ गई है। बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के अलावा बीकेडी पहलवान और इस अपराधी के गैंग के गुर्गे सर्तक हो गए हैं। बताया ये भी जा रहा है कि, मुख्तार अंसारी की रातें करवट बदलते में कट रही हैं। जबकि बीकेडी गैंग पर पुलिस की नजर टिक गई है। लोगों को आशंका है कि, यहां फिर से गैंगवार दस्तक दे सकता है।

कौन है बृजेश सिंह
वाराणसी के धरहरा गांव के रहने वाले बृजेश सिंह का नाम 1984 में पहली बार हत्या से जुड़ा। पिता की हत्या का बदला लेने के लिए उसने हथियार उठाया और अपने पिता के कथित हत्यारे को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद वह फरार हो गया और उनलोगों की तलाश करने लगा जो उसकी पिता की हत्या में शामिल थे। 1986 में बनारस के सिकरौरा गांव में उसने एक साथ पांच लोगों को गोलियों से भून डाला। इसके बाद बृजेश को गिरफ्तार कर लिया गया। बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच कईबार गैंगवार हुआ। दोनों पूर्वांचल में अपनी सल्तन बरकरार रखना चाहते थे। बृजेश और मुख्तार को पुलिस ने सलाखों के पीछे भेजा। 14 साल के बाद डॉन बृजेश जेल से बाहर आया है तो वहीं मुख्तार बांदा जेल में बंद हैं।

2008 में पकड़ा गया था बृजेश सिंह
जेल में रहने के दौरान बृजेश की पहचान कई अपराधियों से हुई और क्राइम का उसका धंधा फलने- फूलने लगा। 1996 में बृजेश के निशाने पर मुख्तार अंसारी आ गया। दोनों में एक दूसरे को दबाने की जंग छिड़ गई। पूर्वांचल में दोनों के गुटों में कई बार गैंगवार हुआ। जिससे जुड़ी कई घटनाएं भी सामने आई। साल 2000 में कई सालों तक फरार रहे बृजेश पर यूपी पुलिस ने 5 लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया था। 2003 में कोयला माफिया सूर्यदेव सिंह के बेटे राजीव रंजन सिंह के अपहरण और हत्याकांड में मास्टरमाइंड के तौर पर बृजेश का नाम आया। 2008 में बृजेश सिंह को उड़ीसा से गिरफ्तार किया गया था। 2022 में डॉन जेल से बाहर आ गया है।

पुलिस और एजेंसियों के रडार से बाहर बीकेडी
मुख्तार अंसारी के बाद बृजेश सिंह के जानी दुश्मन के तौर पर उभरा बीकेडी भी पुलिस और एजेंसियों के रडार से बाहर है। उस पर एक लाख का इनाम है। इंद्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी धौरहरा गांव में बृजेश सिंह का पड़ोसी और पट्टीदार है। बीकेडी उन्हीं हरिहर सिंह का बेटा है जिस पर बृजेश सिंह के पिता रवींद्र सिंह की हत्या का आरोप लगा था। हरिहर सिंह को भी उनके घर में घुसकर हत्या की गई थी। आरोप ब्रजेश सिंह पर लगा था। ब्रजेश पर हत्या का यह पहला मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा बीकेडी के भाई और तब के दबंग पांचू इनामिया का भी नाम ब्रजेश सिंह के पिता की हत्या में आया था। सारनाथ पुलिस ने एनकाउंटर में पांचू को मार गिराया था।

बृजेश के चचेरे भाई सतीश सिंह को गोलियों से भूना
पुलिस का तब मानना था कि पांचू के मारे जाने के बाद ब्रजेश सिंह के पिता की हत्या का बदला पूरा हो गया है। अब कोई गैंगवार नहीं होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीकेडी पिता और भाई दोनों की मौत के लिए बृजेश सिंह को जिम्मेदार मानता है। 4 मई 2013 को इंद्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी पहली बार चर्चा में आया जब टकटकपुर में कालोनी के मोड़ पर उसने बृजेश के करीबी अजय सिंह पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। कई गोलियां लगने के बाद भी अजय बच गया। ठीक दो महीने बाद 3 जुलाई-2013 को बीकेडी ने अलसुबह धौरहरा गांव में बृजेश के चचेरे भाई सतीश सिंह को गोलियों से छलनी कर अपने इरादे साफ कर दिए थे।

बीकेडी के नाम के पीछे दिलचस्प कहानी
इंद्रदेव उर्फ बीकेडी के नाम के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। बताते हैं कि आजादी के बाद स्थापित भारतीय क्रांति दल में उसके बाबा नेता थे। इंद्रदेव के जन्म के बाद उन्होंने ही उसका नाम इस पार्टी पर बीकेडी रखा। उससे छोटे भाई का नाम इसी तुकबंदी में सीकेडी पड़ा। बताया जाता है कि बीकेडी मर्चेंट नेवी में नौकरी करता था। नौकरी के बाद वह पिता और भाई की मौत का बदला लेने लौटा।

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