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पुलिस के पास होते हैं ‘आन मिलो सजना’ ‘पैट्रोल मार’ ‘गुल्ली-डंडा’ और ‘हेलिकॉप्टर मार’ हथियार, इनका नाम सुनते ही लॉकप में तोते की तरह बोलने लगते हैं चोर-लुटेरे और खूंखार बदमाश

लखनऊ। घर के अंदर की सुरक्षा पुलिस के कंधों पर होती हैं, वहीं बार्डर पर अर्धसैनिकबल व सेना के जवान दुश्मनों से मुकाबला करते हैं। सबसे ज्यादा चुनौती भरा काम पुलिस का होता है। ऐसे में अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस कई तरह से हथकंडों का इस्तेमाल करती है। अपराधी की गिरफ्तारी के बाद उससे सच उगलाने के लिए पुलिस के पास कुछ पुलिसिया हथियार होते हैं, जिन्हें देखकर बदमाश तोते की तरह बोलना शुरू कर देते हैं। इन तरीकों को आप और हम भले ही थर्ड डिग्री का नाम दें, लेकिन पुलिस इन्हें स्पेशल नाम “आन मिलो सजना“, “पैट्रोल मार“, “गुल्ली-डंडा“ और “हेलिकॉप्टर मार“ दिया हुआ है।

अपराधियों और विचाराधीन कैदियों पर पुलिस की थर्ड डिग्री को लेकर आएदिन खबरें आती रहती हैं। जिस पर सरकर व आलाधिकारी ऐसे पुलिसवालों पर कार्रवाई भी करते हैं। बावजूद पुलिस शातिरों से सच उगलवाने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाती हैं। जिन्हें थाने में शातिर अपराधियों से जुर्म कबूलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन्हीं में से पुलिस का “आन मिलो सजना“ हथियार है। यह स्पेशल हथियार लैदर का एक पट्टा होता है, जिसके एक ओर लिखा होता है “आन मिलो सजना“ और दूसरी ओर अंकित होता है “समाज सुधारक“। इस स्पेशल हथियार को पुलिस ऐसे शातिर अपराधियों पर इस्तेमाल करती है जो आसानी से मुंह नहीं खोलते। इसे इस्तेमाल करने का भी पुलिस का अपना तरीका है।

सबसे पहले बदमाश को नग्न कर हाथ-पैर बांध दिए जाते है। फिर उसे पीठ के बल लिटाकर उसके ऊपर एक पुलिसवाला बैठ जाता है। फिर लैदर के पट्टे को भिगोकर धीरे-धीरे उसकी पीठ पर मारा जाता है। पुलिस अपनी ओर समाज सुधारक नाम रखती है और आन मिलो सजना का निशान बदमाश की पीठ पर पड़ता है। दो-चार पट्टे पड़ते ही बदमाश तोते की तरह बोलना शुरू कर देता है। जेल से बाहर आए एक कैदी ने बताया कि, चोरी के मामले में पुलिस ने मुझे पकड़ा था। सच उगलाने के लिए इसी हथियार का इस्तेमाल किया। हालांकि, अब ये हथियार बहुत कम थानों में इस्तेमाल किया जाता है।

हेलिकॉप्टर मार बिना डंडे का पुलिस का एक स्पेशल टॉर्चर है। इसमें सबसे पहले तो बदमाश को रस्सियों से उलटा लटका दिया जाता है। हाथ-पैर बांधने के बाद उसे घंटों ऐसे ही रखा जाता है। इस दौरान उसे हाथ तक नहीं लगाया जाता। दो-चार घंटे के बाद बदमाश के हाथ और सिर का ब्लड सर्कुलेशन नीचे आने लगता है और शरीर सुन्न हो जाता है। इस स्थिति में बदमाश ज्यादा देर सहन नहीं कर पाता और सब-कुछ उगल देता है। जानकार बताते हैं कि इस हथियार का इस्तेमाल पुलिस खूंखार बदमाशों पर कभी-कभार करती है। जानकारों का मानना है कि, पिछले कुछ वर्षों से पुलिस को हाईटेक सुविधा मिल गई है, जिससे अब ऐसे हथकंडों की जरूरत न के बराबर रह गई।

पुलिस का गुल्ली-डंडा टॉर्चर बेहद दर्दनाक होता है। इसमें पुलिस बदमाश को गुल्ली-डंडे का आकार देती है। हाथ और पैर बांधकर बदमाश को लंबे और मोटे डंडे के बीच फंसा देते है। इसे ही गुल्ली-डंडा कहते है। डंडे में पूरी तरह से फिट करने के बाद पुलिस उसकी आंखों पर तेज लाइट का फोकस करती है। तेज लाइट आंखों पर पड़ने के बाद अच्छे से अच्छा शातिर भी बिना सवालों का जवाब दिए नहीं रह पाता। जानकार कहते हैं कि, अब भी ऐसे अपराधी हैं जो प्यार से पूछने पर वारदात का राज नहीं उगलते। पिटाई के बाद भी वह मुंह नहीं खोलते। ऐसे में पुलिस इनका मुंह खुलवाने के लिए इस हथकंडे का प्रयोग करती है।

शातिर से शातिर बदमाश से सच उगलवाने के लिए पेट्रोल मार पुलिस का सबसे खतरनाक हथियार होता है। इसमें पुलिस पहले तो बदमाश को पूरा नग्न कर देती है। फिर उसके नाजुक अंगो में पेट्रोल डाल देती है। इसे कभी-कभी खूंखार अपराधियों पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पुलिस बदमाश को रस्सियों से बांधकर एक डंडे के सहारे लटका दिया जाता है। कुछ ही घंटों में बदमाश के लिए खड़ा रहना मुश्किल हो जाता है।

आधिकारिक रुप से पुलिस अब इन हथकंडो को इस्तेमाल नहीं करती लेकिन कई बार खूंखार अपराधियों पर इन्हें छिपते-छिपाते प्रयोग में लाया जाता है। हालांकि पुलिस के ये स्पेशल हथकंडे अब भी उत्तर भारत के कई थानों में आम बात है। जिसको लेकर मानव आयोग के साथ-साथ कोर्ट भी सख्त एक्शन लेती है। फिलहाल यूपी पुलिस द्धारा ऐसे हथकंडे इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है। पहले की तरह अब थर्ड डिग्री का प्रयोग यूपी पुलिस न के बराबर करती है।

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