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dir="ltr" lang="en-US" prefix="og: https://ogp.me/ns#" > मुलायम के जाने के बाद चाचा-भजीजे के मिलन की ‘पटकथा’ सैफई में तैयार ! तो नेता जी के समाजवाद का शिवपाल और अखिलेश करेंगे विस्तार - Astitva News
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मुलायम के जाने के बाद चाचा-भजीजे के मिलन की ‘पटकथा’ सैफई में तैयार ! तो नेता जी के समाजवाद का शिवपाल और अखिलेश करेंगे विस्तार

इटावा। सैफई में इस वक्त मातम पसरा है और हर आंख नम है। डिंपल और अपर्णा एक दूसरे का गम बांट रही हैं तो प्रतीक और अखिलेश भी नजदीक आ रहे हैं । शिवपाल अब अखिलेश के कंधा दे रहे है तो भाई रामगोपाल से भी गिले शिकवे दूर हो रहे है। मरते दम तक नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव ने परिवार में एकता बनाने की भरपूर कोशिश की, आखिरी सांस तक वह शिवपाल और अखिलेश को एक साथ करने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। पर इस दुनिया को अलविदा करने से पहले अखिलेश से कह कर गए कि मेरी जगह पर शिवपाल को समझना नेताजी का कहना।

यूं तो अभी सैफई परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है। लेकिन कहते हैं कई बार दुख के क्षण एक करने में बड़ी भूमिका अदा करते हैं। कुछ वैसा ही सैफई खानदान में नजर आने लगा है। शिवपाल यादव का रुख अचानक अखिलेश के लिए बदल गया है। अखिलेश यादव मौन है लेकिन चुप रह कर के भी हो बहुत से संकेत दे रहे हैं। शिवपाल आज खुलकर बोले कहा नेताजी के जाने के बाद अब जो जिम्मेदारी मिलेगी उसे उठा लूंगा उसे पूरा करूंगा। आज तक मैंने कभी नेताजी की इच्छा का नाटक नहीं किया जो कुछ किया उनसे पूछ कर किया। उनकी इजाजत लेकर किया आगे भी जो नेताजी की इच्छा थी उसे पूरा करने के लिए काम करूंगा।

बता दें, मेदांता के अस्पताल से लेकर सैफई तक मुलायम सिंह यादव के आखिरी सफर तक शिवपाल और अखिलेश एक दूसरे के साथ दिखाई पड़े। यहां तक कि जाने के बाद भी अखिलेश और शिवपाल दोनों साथ दिखाई दे रहे। इतना ही नहीं नेता जी के अंतिम संस्कार के वक्त और बुधवार को अस्थियां चुनने के वक्त शिवपाल अखिलेश के साथ रहे। चाचा-भतीजा एक-दूसरे से बात करते नजर आए। हालांकि अभी अखिलेश यादव अभी अपनी तरफ से कोई बयान नहीं दिया। पर सूत्रों की माने तो आने वाले वक्त में चाचा और भतीजा एक साथ होंगे और समाजवादी पार्टी में प्रसपा प्रमुख को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

दरअसल, 2022 के चुनाव के बाद अखिलेश और शिवपाल के बीच जबरदस्त तल्ख़यिं बढ़ गई थीं। शिवपाल ने ऐलान कर दिया था कि वह अब कभी अखिलेश के पास लौट कर नहीं आएंगे। लेकिन भाई का साया सिर पर से हटने के बाद शिवपाल अब अखिलेश के ऊपर विनम्र नजर आ रहे हैं। उन्हें मालूम है कि पार्टी में उनकी कोई भूमिका हो ना हो लेकिन परिवार में उनकी भूमिका बड़ी हो गई है। मुलायम की वह केवल अनुज ही नहीं थे बल्कि मुलायम सिंह यादव के लक्ष्मण की तरह हर संघर्ष की वह साक्षी के साथ ही साथी भी रहे। मुलायम सिंह यादव जब धूल फांक रहे थे सियासत में संघर्ष कर रहे थे तब उनके साथ उन का छोटा भाई शिवपाल ही था ठीक लक्ष्मण की तरह अपने राम की एक-एक आदेश का अक्षर से पालन करता हुआ उन्हें आगे बढ़ता हुआ पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा था।

वह भी मौका आया जब एक पिता अपने पुत्र को सत्ता सौंप रहा था, उस वक्त टकराव की स्थिति बनी। चाचा भतीजे के रास्ते अलग हो गए। लेकिन भाई से ना तो इसने कम हुआ ना समर्पण आखरी दम तक नेताजी के एक आदेश पर अमल करते रहे शिवपाल। अब सपा संरक्षक की भूमिका मुलायम के बाद कौन निभाएंगे इस पर विचार हो रहा है। शिवपाल यादव से बेहतर ये जगह कोई और नहीं भर सकता। क्योंकि शिवपाल मुलायम के हमसाया है और यह बात अखिलेश को भी बखूबी मालूम है यही वजह है की उम्मीद अब परवान चढ़ने लगी है कि शायद समाजवादी कुनबा एक बार फिर एक हो जाए।

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