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जिला अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को किया खारिज, ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केस में हिंदू पक्ष के हक में सुनाया फैसला, जानें क्या है पूरा मामला अब हाईकोर्ट क्यों जाएंगे अधिवक्ता

वाराणसी। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केस में सोमवार को वाराणसी जिला जज की अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए ज्ञानवापी परिसर में मां श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा की अनुमति देने वाली याचिका को सुनवाई योग्य माना है। कोर्ट ने पूरे प्रकरण की सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख मुकर्रर कर दी है। फैसले हिन्दू पक्ष के लोगों ने जश्न मनाया तो वहीं मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने जिला जज के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

क्या है पूरा मामला
अगस्त 2021 में 5 महिलाओं ने श्रृंगार गौरी में पूजन और विग्रहों की सुरक्षा को लेकर याचिका डाली थी। इस पर सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी का सर्वे कराने का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला. जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि ये एक फव्वारा है। इसके बाद हिंदू पक्ष ने विवादित स्थल को सील करने की मांग की थी। सेशन कोर्ट ने इसे सील करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ मुस्लिम सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केस जिला जज को ट्रांसफर कर इस वाद की पोषणीयता पर नियमित सुनवाई कर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था। मुस्लिम पक्ष की ओर से यह दलील दी गई थी कि ये .कि ये प्रावधान के अनुसार और उपासना स्थल कानून 1991 के परिप्रेक्ष्य में यह वाद पोषणीय नहीं है, इसलिए इस पर सुनवाई नहीं हो सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की बात सुनने के बाद कहा था कि अब दोनों पक्षों की सुनवाई जिला अदालत में होगी। साथ ही मस्जिद में नमाज पढ़ने के निर्देश देने के साथ जिस हिन्दू पक्ष शिवलिंग बता रहे हैं, वहां पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने को कहा था।

मुस्लिम पक्ष के रूल 7 नियम 11 के आवेदन को खारिज किया
जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेस मुस्लिम पक्ष के रूल 7 नियम 11 के आवेदन को खारिज किया। मुख्य रूप से उठाए गए तीन बिंदुओं- प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड से इस वाद को बाधित नहीं माना और श्रृंगार गौरी वाद सुनवाई योग्य माना। जिला जज ने 26 पेज के आदेश का निष्कर्ष लगभग 10 मिनट में पढ़ा। इस दौरान सभी पक्षकार मौजूद रहे। अदालत के फैसले के बाद हिंदू पक्ष के लोगों में खुशी की लहर है। इधर, वाराणसी में हाई अलर्ट है। कचहरी परिसर, काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र समेत अन्य संवेदनशील इलाकों में पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है। गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर छह से ज्यादा मुकदमे अलग-अलग कोर्ट में लंबित हैं।

ज्ञानवापी मंदिर के लिए यह मील का पत्थर
हिंदू पक्ष के पैरोकार सोहन लाल आर्य ने कहा कि आज हिंदू समाज को बहुत बड़ी जीत मिली है। अगली सुनवाई 22 को होगी। ज्ञानवापी मंदिर के लिए यह मील का पत्थर है। हम सभी लोगों से शांति की अपील करते हैं। ज्ञानवापी मामले में महिला वादियों के पैरौकार व विश्व वैदिक संघ से प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने कहा कि संपूर्ण सनातन समाज को प्रथम जीत की मंगलमय शुभकामनाएं। सभी पक्ष संयम और विवेक से कार्य करें। अति उत्साह में देश की शांति व्यवस्था ना बिगड़े इस बात का विशेष ध्यान रखें। हर-हर महादेव।

सर्वे की कार्यवाही के बाद लगातार चल रही सुनवाई
16 मई 2022 को सर्वे की कार्यवाही के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 मई 2022 से इस मामले में जिला कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जून के आखिरी हफ्ते से लगातार इस मामले पर हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के वकीलों द्वारा दलीलें पेश की जा रही थीं। सोमवार को अदालत ने हिंदू पक्ष के हक में फैसला सुनाया। हिंदू पक्ष के दावे के मुताबिक 1993 से पहले तक मस्जिद के कुछ हिस्सों में हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक पूजा होती थी और इस ज्ञानवापी मस्जिद का पूरा ढांचा मंदिर को तोड़कर बनाया गया है।

किसी धार्मिक स्थल के चरित्र को बदला नहीं जा सकता
दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि 1947 के बाद किसी धार्मिक स्थल के चरित्र को बदला नहीं जा सकता। साथ ही साथ 1991 के विशेष उपासना स्थल कानून के तहत कमीशन की कार्यवाही भी गलत है। अब जिला जज के फैसले से हिंदू पक्ष के दावों पर मुहर लगी है। श्रृंगार गौरी नियमित दर्शन का मामला अब आगे चलेगा। फैसले के खिलाफ एक पक्ष ऊपरी अदालत का रुख करेगा। जिला जज की अदालत में अगली सुनवाई 22 सिंतबर को होगी। माना जा रहा है कि ये मामला अभी लंबा चलेगा।

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