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Kolkata: विश्वयुद्ध नहीं ये अर्धविश्वयुद्ध है: ज्योतिषाचार्य मधुसूदन मिश्र, “पं. ज्योतिर्माली”

पुतिन या जेलेंस्की किसकी मंशा पूरी होगी?
ज्योतिषाचार्य मधुसूदन मिश्र, “पं. ज्योतिर्माली”

Kolkata: विश्व में छिड़े महासंग्राम जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 24 फरवरी 2022 की सुबह यूक्रेन वासियों के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। शांति और सहजता के प्रतीक पुतिन का रुख इस प्रकार करवट लेगा यह किसी ने नहीं सोचा था। यूक्रेन की जिद और नाटो में शामिल होकर बड़े सैन्य बल की सूची में अपना नाम दर्ज कराने की हड़बड़ाहट ने रुस को कहीं न कहीं लाचार और बेबस होकर हमले की प्रक्रिया को अपनाने के लिए मजबूर किया। रुस का युद्धाभ्यास से अचानक हमलावर हो जाना विश्व को अचम्भित करने वाला था। अब यूक्रेन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और रुस अपना वर्चस्व दिखा रहा है। क्या ये युद्ध तीसरे विश्वयुद्ध की आहट है। इस युद्ध का अंजाम क्या होगा। रुस अपनी रणनीति में सफल होगा या यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अपने मकसद में सफल होंगें। क्या अमेरिका और रुस खुलकर आमने-सामने आएंगें। क्या ये शक्तियां आपस में टकराएंगीं। रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 फरवरी 2022 को 08 बजकर 24 मिनट पर युद्ध की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर घोषणा कर दी। इसके बाद यूक्रेन दूसरे ही दिन ही धराशायी हो गया। आत्मबल से किसी भी युद्ध को जीता जा सकता है यह यूक्रेन के जेलेंस्की ने साबित कर दिया है।

7 अक्टूबर 1952 को जन्मे व्लादिमीर पुतिन वृष राशि कृतिका नक्षत्र के व्यक्ति हैं। उनकी कुंडली में शनि में बृहस्पति की दशा चल रही है। यूक्रेन पर अपना दबदबा दिखाने के लिए रूस वैश्विक मंच पर अपनी रणनीति बनाने लगेगा। संभवत: नाटो रुस के आमने सामने आ डटे। नाटो के सभी देश यूक्रेन को सहयोग देने पर एकमत होते नहीं दिखेंगें। जिससे स्थिति को संभालने में मुखिया देश अपनी भागीदारी पूर्ण करते नजर आएगें। पुतिन की मंशा अमेरिका से आगे बढ़ जाने की है। चीन, अमेरिका और रुस के मध्य चल रहा आतंरिक द्वन्द जिसमें स्वयं को विश्व का सबसे सशक्त और ताकतवर देश बनकर उभरने की लालसा बनी हुई है। अमेरिका को सुपर पावर के शीर्षस्थ पद से पदच्यूत करने की है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन जो सिर्फ नाटो को सशक्त और रूस को उसकी औकात दिखाने के लिए यूक्रेन का साथ देंगे। उनकी मंशा स्पष्ट है कि उन्हें अपने राष्ट्र को प्रथम ही रखना है- अमेरिका फर्स्ट। पुतिन की कुंडली पर दृष्टि डाले तो पुतिन की मानसिक अस्वस्थता 24 नवम्बर 2022 तक बनी रहेगी। इस बात को समझें तो पूरा साल ही युद्ध सम संभावित स्थिति बनती बिगड़ती रहेगी। कारण भूतपूर्व यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर को पुनः स्थापित करने की मंशा मंशा ही रह जायेगी। पुतिन के सप्तम भाव में बृहस्पति विधमान है तो वहीं बृहस्पति की सीधी दृष्टि लग्न भाव पर पड़ रही है। जिसका तात्पर्य है पुतिन का स्वाभिमान समय के साथ अहंकार में तब्दील हो चुका है। सर्वश्रेष्ठ बनने की चाहत अमेरिका को झुकाने की आकांक्षा स्पष्ट रुप से झलक रही है। परन्तु ग्रहों की चाल कुछ और ही संकेत दे रही है। ऐसे में कर्क राशि के जेलेंस्की बातों और भाग्य के धनी हैं परन्तु उनके सहयोगी, उनके कर्मचारी और उनका भाग्य ही कभी कभी उन्हें धोखा दे देता है। जिस प्रकार सत्ता सुख अचानक प्राप्त हुआ उसी प्रकार अचानक रातों रात सत्ता छीन सी भी गई है। चंद्रमा मंगल होने से परिस्थितियां जलेंस्की के हाथों से निकल भी जाती है। वक्त के साथ समझौता और सही वक्त का इंतजार जलेंस्की की अंदरुनी ताकत है। जिसे वो जगजाहिर नहीं करते हैं। चंद्रमा की दशा में उठा पटक देखने वाले जेलेंस्की अब नई रणनीति के तहत काम करने वाले हैं। उनकी उम्र मात्र 44 वर्ष की है पर अपने अनुभवों से सीख लेने वाले जेलेंस्की अभी झुक रहे हैं संधि का प्रस्ताव दे रहे हैं- मजबूरी में, अपने देश को बचाने के लिए उनका यह कदम भी रणनीति का एक हिस्सा है। पुतिन की हर चाल से अंजान जेलेंस्की ने मुसीबत को ना कहकर दलदल में कदम तो रख ही दिया है। इस भयावह युद्ध का परिणाम संधि नहीं हो सकता है। ग्रह ऐसे संकेत नहीं दे रहे हैं। शनि मंगल जहां एक साथ हों और राहु की प्रबल दृष्टि पड़ रही हो ऐसे में भला शांति और संधि असम्भव ही दिखती है। युद्ध रुक रुक कर ही सही पर दीर्घकाल तक चलेगा। यूक्रेन खंडित अवश्य हुआ है पर टूटा नहीं है। उसमें अब भी वह अदम्य शक्ति है कि वह वक्त की गति को भांपकर उठ खड़ा होने की क्षमता रखेगा। कहीं न कहीं यह बात बाद में खुलकर सामने आएगी कि जिस सलाहकार की बात मानकर जेलेंस्की ने नाटो में जाने की बात को लेकर अड़ियल रवैया अपना लिया था और रुस के सामने हुंकार भरने का दुस्साहस कर उसे चुनौती देना उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। उनके इसी फैसले के कारण उनके देशवासी, बाहर से आए विद्दार्थी सभी को अचानक एक सुबह संकट का सामना करने को मजबूर होना पड़ा। देश को बर्बाद कर देने वाला यह आत्मघातक निर्णय इतिहास में सदैव के लिए दर्ज हो गया। बड़े बड़े देशों ने आकाश मार्ग पर रुस के लिए प्रतिबंध नाममात्र का लगाया है। फलस्वरुप रुस ने भी उनके लिए अपने आकाश मार्ग को बंद कर दिया। परिणाम क्या निकला। 27 मार्च 2022 तक स्थिति संकटपूर्ण रहेगी। विनाशकारी संघर्ष विकट रुप ले सकता है। 18 अप्रैल 2022 के आसपास संधि पर रुस विचार करने की इच्छा जता सकता है। साथ ही पलट जाने की रणनीति मन में दबाकर रखेगा।

जलेंस्की को पुतिन उन्हें तड़पाकर संधि का प्रस्ताव रखेंगें तो ऐसे में पहली शर्त यही होगी कि यूक्रेन लिखित दे कि वह नाटो के साथ कभी भी शामिल नहीं होगा। जैसे हवा में आक्सीजन रहे पर श्वांस कार्बन डाई आक्साइड की लेनी होगी। ऐसे में यूक्रेन के नाममात्र के राष्ट्रपति क्या करेंगें। संधि करने के पश्चात धोखा देंगें तो परिणाम बिना कुछ किए वो और उनका देश भुगत ही चुका है। 13 मार्च 2022 को दोपहर 12 बजे के बाद भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर मोदी रुस के राष्ट्रपति पुतिन से संधि वार्ता करने की पहल फिर कर सकते हैं। तबतक बहुत कुछ उजड़ चुका होगा। पुतिन उम्र और अनुभव दोनों में ही बड़े हैं साथ ही एक बड़े साम्राज्य को चलाने का इतिहास भी रच चुके हैं। जेलेंस्की, की उम्र, देश और अनुभव तीनों ही पुतिन के आगे बौनी हैं। पुतिन एक मजे हुए कूटनीतिज्ञ हैं तो साम, दाम दंड भेद की नीति में भी महारत हासिल है। कभी स्वयं गुप्तचर विभाग में काम कर चुके पुतिन का अनुभव बहुत गहरा है और नीति, रणनीति, कूटनीति मजी हुई है। ऐसे में बेबी यूक्रेन ने बच्चों की तरह हड़बड़ी मचा कर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। नाटो का सदस्य न होने के कारण अलग थलग पड़ गए जेलेनस्की विश्वमंच पर असहाय और गलत धारणाओं के शिकार हो गए थे। आज भी उनके सलाहकार उन्हें सही रणनीति नहीं बता पा रहे हैं। खंडहर हो चुके यूक्रेन पर पुतिन का कब्जा होना कोई बड़ी बात नहीं है। 70 वर्षीय पुतिन को इस समय अपने देश को सुपरपावर घोषित करने की चाह जग चुकी है।

विस्तारवादी नीति रुस के दिमाग में घर कर चुकी है। चीन सामने से रुस का साथ न देकर पीछे से सहयोग करने का आश्वासन देगा। चीन की ड्रैगन रणनीति से रुस भी धोखा खा सकता है। क्योंकि चीन अपनी रणनीति में ना तो किसी को सेंध लगाने देगा और ना ही कहीं सेंध लगाने से बाज़ ही आएगा। ऐसे में चीन को अपना दोस्त समझकर बहुत हड़बड़ाहट में पुतिन का कदम उनके लिए ही भविष्य में सिर दर्द बन सकता है। चीन की दुधारी तलवार पर रुस अपनी गर्दन कितने दिन तक टिका पाएगा। उसे समझना होगा कि चीन अविश्वसनीय है। जेलेंस्की का भाग्यभाव में ऐसा उतार चढ़ाव है कि उनके साथ कब क्या हो जाए अच्छा या बुरा उन्हें भी बहुत बार समझ में नहीं आएगा। लगेगा कि नाटो साथ नहीं देगा पर 30 देशों में से कुछ देश अपने फायदे के लिए यूक्रेन का साथ देने के लिए आगे कदम बढ़ाऐंगें। जिनमें फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे कुछ और देश मदद के लिए आगे बढ़ सकते हैं। जिससे छुपा हुआ चीन अपनी अलग ही रणनीति बनाने में जुट जाएगा।
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