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कासनी गांव में होते हैं भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन, जानिए सिर्फ नवरात्रि की पंचमी के दिन ही क्यों होता है विशेष पूजन

पिथौरागढ। उत्तराखंड को देवों की भूमि कहा जाता है। यहां अनके धार्मिक मान्यताओं के साथ प्राचीन काल के ऐतिहासिक मंदिरों की श्रृंखला है और जिनका जिक्र हमारे पुराणों और गृन्थों में भी है। इसी के चलते देवभूमि की देश ही नहीं विदेश में अपनी अलग पहचान के लिए जाना जाता है। ऐसे ही प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला में आता है पिथौरागढ़ जिले के कासनी गांव में स्थित विष्णु मंदिर, जिसका निर्माण 11वीं सदी के आसपास माना जाता है। कहा जाता है यहां भगवान विष्णु अपने भक्तों को साक्षत दर्शन देते हैं। मंदिर में पूजा साल में सिर्फ नवरात्रि की पंचमी के दिन होती है।

11वीं सदी का प्राचीन विष्णु मंदिर
पिथौरागढ़-झूलाघाट रोड से करीब पर चार किलोमीटर की दूरी पर कासनी गांव है। यहां पर 11वीं सदी का प्राचीन विष्णु मंदिर है। मंदिर का निर्माण कत्यूरी राजाओं ने करवाया था। कासनी गांव में स्थित इस मंदिर में भगवान विष्णु की दशावतार की अद्भुत मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में देखने को मिलती है। नागर शैली से बना यह मंदिर जहां पर पांच मंदिरों का समूह हुआ करता था, लेकिन वक्त के साथ उचित संरक्षण न मिलने के कारण दो मंदिरों की शिलाएं ध्वस्त हो गईं। जिनके पत्थरों से मंदिर के नजदीक ही नौलों का निर्माण किया गया है। इसके पानी का इस्तेमाल मंदिर के धार्मिक कार्यों में किया जाता है।

1000 साल से ज्यादा पुरानी प्रतिमा मंदिर में विराजमान
स्थानीय लोग बताते हैं कि, आदिगुरु शंकराचार्य के उत्तराखंड के इलाकों में भ्रमण के दौरान यहां विष्णु मंदिरों के निर्माण का प्रचलन बढ़ा था। इस दौरान कई मंदिरों का निर्माण करवाया गया। तभी कासनी गांव के विष्णु मंदिर का भी भव्य निर्माण हुआ। ग्रामीण बताते हैं कि, भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपने आप में धार्मिक महत्व के साथ इतिहास के भी तमाम पहलू समेटे हुए है। यहां भगवान विष्णु के दशावतार वाली 1000 साल से ज्यादा पुरानी प्रतिमा मंदिर में विराजमान है। ऐसा मंदिर और प्रतिमा उत्तराखंड में और कहीं नहीं है। यह मंदिर हमेशा खुला रहता है। श्रद्धालु किसी भी समय भगवान विष्णु के दर्शन कर सकते हैं। यहां
सिर्फ नवरात्रि की पंचमी को विशेष पूजन होता है।

काशी के कसनियाल परिवार करता है मंदिर की देखभाल
कत्यूरी राज में मंदिर के देखभाल के लिए काशी के कसनियाल परिवार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिनके नाम से ही कासनी गांव का नाम पड़ा। इतिहासकार मनीष कसनियाल बताते हैं कि भगवान विष्णु की दशावतार वाली प्राचीन प्रतिमा सिर्फ पिथौरागढ़ के कासनी में स्थित विष्णु मंदिर में ही देखने को मिलती है।कहते हैं, ऐतिहासिक धरोहर होने के बावजूद भी पिथौरागढ़ के प्राचीन विष्णु मंदिर को उपेक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को समेटे हुए इस मंदिर को जिले के धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है, जिससे गुमनाम हो रही इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षण मिल सके।

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